मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के 62वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुई और समारोह को संबोधित भी किया। इस दौरान राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने न केवल कृषि से संबंधित अनुसंधान और विकास कार्यों को कुशलतापूर्वक किया है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया है कि ऐसे अनुसंधान जमीन पर पहुंचें।
जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस दौरान अपने संबोधन में आगे कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने भारत द्वारा खाद्य सुरक्षा प्राप्त करने में अतुलनीय योगदान दिया है। इस संस्थान ने न केवल कृषि से जुड़े अनुसंधान एवं विकास कार्यों को दक्षतापूर्वक किया है बल्कि यह भी सुनिश्चित किया है कि ऐसी जानकारी प्रयोगशाला के बाहर धरातल पर जाकर मूर्त रूप ले सके। मुझे यह जानकर खुशी हुई है कि यह संस्थान अनुसंधान के साथ-साथ एक वैश्विक विश्वविद्यालय बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पड़ोसी देशों में मानव संसाधन विकास कार्य करके IARI ने न केवल ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के दर्शन का परिचय दिया है, बल्कि भारत की नम्र शक्ति को भी बढ़ाया है। ऐसा कहा जाता है कि किसान के हल की नोक से खींची गई रेखा सभ्यता के पूर्व के समाज और विकसित समाज के बीच की रेखा है। किसान न केवल विश्व के अन्नदाता हैं, बल्कि सही अर्थों में जीवनदाता हैं। गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर ने कहा है ‘God is where the tiller is tilling the hard ground’। हम सब किसान एवं कृषि संबंधी समस्याओं से अवगत हैं। हमारे कितने ही किसान भाई-बहन आज भी गरीबी में जीवन-यापन कर रहे हैं। किसान को उसकी उपज का सही मूल्य मिले, वह अभावग्रस्त जीवन से समृद्धि की और बढ़े, इस दिशा में हमें और भी अधिक तत्परता से आगे बढ़ना होगा।
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