मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन देश के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सेवा तीर्थ, कर्तव्य भवन 1 और 2 विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा में एक अहम पड़ाव हैं। नई दिल्ली में शुक्रवार को शाम सेवा तीर्थ परिसर में एक सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ये नागरिक-केंद्रित शासन और देश की उन्नति के लिए सरकार की वचनबद्धता को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि यहां लिए गए निर्णय किसी राजा की सोच को नहीं, बल्कि 140 करोड़ नागरिकों की उम्मीदों को आगे बढ़ाने की नींव का काम करेंगे। आज़ादी के बाद, देश के लिए कई अहम फ़ैसले और नीतियां साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतों से बनाई गईं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य के निशान के तौर पर बनाई गई थीं। इनका उद्देश्य भारत को सदियों तक गुलामी में जकड़े रखना था। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे लोग विकसित भारत की ओर बढ़ रहे हैं, यह ज़रूरी है कि भारत औपनिवेशिक सोच का हर निशान छोड़ दें। प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का पहला क्वार्टर अब पूरा हो चुका है, और यह ज़रूरी है कि एक विकसित भारत की परिकल्पना सिर्फ़ नीति और योजनाओं में ही नहीं, बल्कि कार्य स्थल और कार्यालय में भी दिखे। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि जिन स्थानों से देश चलाया जाता है, वे असरदार और प्रेरणा देने वाली, प्रभावशाली और उत्साहवर्धन करने वाले होने चाहिए।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीएम मोदी ने कहा कि आज़ादी के दशकों बाद भी भारत सरकार के कई मंत्रालय दिल्ली में 50 से ज़्यादा अलग-अलग जगहों से काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हर साल इन मंत्रालयों की बिल्डिंग के किराए पर 15 सौ करोड़ रुपये खर्च हो रहे थे, जबकि रोज़ाना आठ हज़ार से 10 हज़ार कर्मचारियों के एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय आने-जाने पर लॉजिस्टिक्स का खर्च आता था। उन्होंने कहा कि सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन बनने से ये खर्च कम होंगे और कर्मचारियों का समय बचेगा। उन्होंने कहा कि सेवा तीर्थ सिर्फ़ एक नाम नहीं बल्कि एक संकल्प है। यह नागरिकों की सेवा के ज़रिए एक पवित्र जगह, सेवा के वादे को पूरा करने की एक जगह है। पीएम मोदी ने कहा कि रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग कर दिया गया है और यह सिर्फ़ नाम बदलना नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सत्ता की सोच को सेवा की भावना में बदलने की कोशिश है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे भारत रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार होकर अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक नया अध्याय लिख रहा है, व्यापार समझौते के ज़रिए नए दरवाज़े खोल रहा है और परिपूर्णता के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है, काम की नई रफ़्तार और सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवनों में नया भरोसा राष्ट्र के लक्ष्यों को प्राप्त करने में बड़ी भूमिका निभाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले ग्यारह सालों में शासन का एक नया मॉडल सामने आया है, जहाँ नागरिक फ़ैसले लेने के केंद्र में हैं। उन्होंने कहा कि “नागरिक देवो भव” सिर्फ़ एक मुहावरा नहीं बल्कि कार्य संस्कृति है। इस संस्कृति को अधिकारियों को इन नई इमारतों में आते ही अपनाना चाहिए। पीएम मोदी ने घोषणा की कि सेवा तीर्थ में लिया गया हर निर्णय, हर फ़ाइल आगे बढ़ाई गई और बिताया गया हर पल एक सौ 40 करोड़ नागरिकों की ज़िंदगी को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए। इस अवसर पर, पीएम मोदी ने सेवा तीर्थ स्मारक सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया।
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