मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज थाईलैंड के बैंकॉक में विश्व बैंक-आईएमएफ की वार्षिक बैठकों के दौरान जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (जेबीआईसी) के गवर्नर काज़ुहिको अमाकावा से मुलाकात की। आज एक सोशल मीडिया पोस्ट में वित्त मंत्रालय ने बताया कि इस चर्चा में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा परिवर्तन, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और मजबूत सप्लाई चेन के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसमें 600 मिलियन डॉलर के ‘इंडिया-जापान फंड’ और ‘नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड’ (एनआईआईएफ) में जापानी भागीदारी के माध्यम से सहयोग बढ़ाने की बात शामिल थी।
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्ट में आगे बताया कि गवर्नर ने ‘इंडिया-जापान फंड’ की सफलता का जिक्र किया, जिसके तहत ई-मोबिलिटी और बायोएथेनॉल जैसे क्षेत्रों में निवेश किया गया है। उन्होंने एक और नए फंड (फॉलो-ऑन फंड) के शुरू होने की उम्मीद भी जताई। उन्होंने ‘नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन’ (एनआईसीडीसी) में जेबीआईसी की हिस्सेदारी का उल्लेख किया। साथ ही, उन्होंने सेमीकंडक्टर (जिसमें धोलेरा में मौजूद अवसर भी शामिल हैं), एआई और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में जापान की बढ़ती दिलचस्पी के बारे में बताया। केंद्रीय वित्त मंत्री ने संतुलित शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए विशाखापत्तनम जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में डेटा सेंटर्स के क्षेत्र में जापानी निवेश को प्रोत्साहित किया। दोनों पक्षों ने भारत-जापान के बीच आर्थिक और वित्तीय सहयोग को और गहरा करने तथा एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने की संभावनाओं पर चर्चा की।
News Source : Social Media
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